विश्व पृथ्वी दिवस: गायब हो रहे जंगल, दरक रहे गलेशियर.. प्रजातियों पर भी मंडरा रहा खतरा; इन 5 तरीकों से बचाएं धरती

आज यानी 22 अप्रैल को विश्व पृथ्वी दिवस है। पृथ्वी दिवस यानी धरती को बचाने के प्रति लोगों को जागरूक करने का दिन। दरअसल औद्योगिक काल से पहले धरती पर सभी प्राकृतिक संसाधन (जल, जंगल, जमीन, हवा, ग्लेशियर आदि..आदि) उपयुक्त और संतुलित रूप में विद्यमान थे। बढ़ती आबादी के साथ लोगों की जरूरतें बढ़ीं तो इन संसाधनों का दोहन शुरू हुआ।
जीवाश्म ईंधनों के अति इस्तेमाल ने ग्लोबल वार्मिंग का संकट खड़ा किया। इसके बाद ऐसे उपायों पर जोर दिया जाने लगा, जिससे दुनिया विकास भी कर सके और धरती भी सुरक्षित रहे। स्वच्छ ऊर्जा इन्हीं में से एक है।

इस बार के पृथ्वी दिवस की थीम ऊर्जा के इसी रूप को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। ऐसे में इस बात की पड़ताल अहम मुद्दा है कि स्वच्छ ऊर्जा से धरती के सामने सबसे बड़े संकट को कैसे टाला जा सकता है।
आप भी कर सकते हैं ये पांच काम
हम धरती को माता कहते हैं। कारण है कि इंसान को जन्म भले ही एक महिला देती है, लेकिन उसका पालन-पोषण इस पृथ्वी पर होता है। पृथ्वी प्रदत्त प्राकृतिक चीजों से वह जीवित रहता है। इंसान जन्म के बाद अपनी माता के बिना रह सकता है, लेकिन पृथ्वी और प्राकृतिक चीजों के बिना वह क्षण भर भी जीवित नहीं रह सकता।
1. जल संरक्षण

‘जल ही जीवन है’, ये मात्र कहने भर की बात नहीं। पृथ्वी पर जल का होना वरदान है। ऐसे में पृथ्वी को बचाने के लिए जल संरक्षण करना बहुत जरूरी है। पानी की बर्बादी के कारण ही भूमण्डल के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इसलिए सभी को ज्यादा से ज्यादा पानी बचाना चाहिए। इसके लिए पानी के अन्य स्रोतों पर ध्यान दें। नल को ठीक से बंद करें। पानी बेवजह खर्च न करें। बारिश के पानी को स्टोर करके उसका इस्तेमाल करें।

2. कचरा प्रबंधन

धरती पर कचरा भी बढ़ता जा रहा है। उसका उचित प्रबंधन और रीसाइक्लिंग न होने के कारण जगह जगह कचरे के ढेर लगे रहते हैं, जो वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण का कारण बनते हैं।
ऐसे में हमारा काम है कि यह प्रयास करें कि घरों से निकलने वाला कचरा गलने वाला हो। गीले और सूखे कचरे को अलग अलग फेकें। सबसे जरूरी है कि पॉलीथिन बैग के इस्तेमाल में कमी लाएं।

3. वायु प्रदूषण कम करें

वर्तमान में वायु प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। लोगों के लिए खुली हवा में सांस लेना जहर को अपने अंदर लेने जैसा है। वाहनों की बढ़ती संख्या और हवाई जहाजों से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण फैलता है।

ऐसे में गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करके दूर न जाना हो तो साइकिल का इस्तेमाल कर सकते हैं। चाहें तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।

4. केमिकल के इस्तेमाल में कमी

आधुनिक भारत में लगभग हर काम के लिए वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल होता है। ऐसे में केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। जैसे खेती के लिए केमिकल पदार्थों का इस्तेमाल, नहाने से लेकर कपड़े और बर्तन धोने के लिए भी केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल हो रहा है।

5. बिजली के इस्तेमाल में कमी

बिजली की जरूरत बढ़ रही है लेकिन बिजली बर्बाद करने से भी प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो रहा है। दरअसल, बिजली बनाने के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा कई प्राकृतिक गैसों से भी बिजली बनती है। ऐसे में पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है।



प्रदूषण पृथ्वी को धीरे धीरे नष्ट कर रहा है। ऐसे में जरूरत होने पर ही बिजली का इस्तेमाल करें। बेवजह लाइट, फैन चलाकर न छोड़ें।

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